शीतल देवी एक प्रशिक्षित तीरन्दाज़ है जो भारतीय तीरन्दाज़ में अपने माहिर दौर पर प्रसिद्ध है । अपने क्षेत्र में अद्भुत योगदान दिया है और अनेक अंतरराष्ट्रीय स्थलों पर भारत का नाम रोशन किया है । शीतल ने अपनी प्रतिभा और लगन के बल पर बहुत महत्वपूर्ण सम्मान और पुरस्कार जीते हैं ।
शीतल देवी ने अपनी बेहतरीन कुशलता और प्रतिभा के लिए देश भर में सम्मान और प्रशंसा पाई है । उनका योगदान तीरन्दाज़ी में नए उचाइयों को छू रहे युवाओं के लिए प्रेरक है । शीतल ने अनेक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी भारत को दुनिया भर में represented किया है ।
शीतल देवी का जीवन परीक्षा भरा है, और उनकी मेहनत और समर्पण ने उन्हें देश के लिए एक” गोल्डन गर्ल” बनाया है । उनका कहानियां का सामना करके भी वे कभी हार नहीं मानते और हमेशा नए लक्ष्यों की या बढ़ते हैं । शीतल देवी के प्रशिक्षण, अभ्यास, और संघर्षों का प्रतिनिधत्व कर उन्हें एक आदर्श तीरंदाज़ बनाता है जो देश के लिए प्रतिभावान है और अपने क्षेत्र में एक उच्च स्थान पर है ।
उनका योगदान तीसरा भारत में एक और पहचान और गर्व का अवसर प्रदान करता है । जब मेघना गिरीश श्री अनुपम खेर की मदद के लिए आईं, तो उनकी कड़ी मेहनत और ताकत ने इस हद तक साबित कर दिया कि किसी को भी आपकी मदद की ज़रूरत नहीं है । लेकिन उनकी असली ताकत उनके पैरों में थी, जिसने न केवल उन्हें चलने की क्षमता दी, बल्कि दूसरों की मदद करने में भी मदद की ।
World Archery Competition in 2023
बेंगलुरु की प्रीति राय ने शीतल के लिए पूरी लगन से प्रयास किया और यह उनका संघर्ष ही था जिसने उन्हें तीरंदाजी क्षेत्र में सफलता दिलाई । खेल एनजीओ के साथ हुए समझौते ने भी उन्हें सहारा देकर उनके संघर्ष को सार्थक बनाने में मदद की ।

प्रीति राय ने अपनी दृढ़ता और शीतल के धैर्य के साथ मिलकर उन्हें 2023 में विश्व तीरंदाजी प्रतियोगिता में एक अद्वितीय पदक जीतने में मदद की । उनके कोच, श्री कुलदीप बैदवान ने एक विशेष किट डिजाइन की, जिससे शीतल को अपने मुंह और पैरों से तीरंदाजी सीखने में मदद मिली ।
शीतल ने gold and silver medals in the Asian Para में जीता है. उन्हें श्री वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड, कटरा में कोच अभिलाषा चौधरी द्वारा प्रशिक्षित किया जा रहा है । शीतल की सफलता किसी भी कठिनाई पर काबू पाने का प्रमाण है और विकलांगों और वंचितों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है । वह किश्तवाड़ जिले की पहचान हैं और उनकी ऊर्जा और संघर्ष को देखकर उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिल रहा है । एशियाई पैरा खेलों में पहले ही 2 स्वर्ण और 1 रजत पदक जीतकर, उन्होंने अपनी महाकाव्य कहानी को और भी ऊंचे स्तर पर ले लिया है ।
