नागुला चतुर्थी को नागुला चविथि भी कहा जाता हैं । नागुला चविथि दिवाली अमावस्या के बाद कार्तिक महीने के चौथे दिन को समर्पित है और यह एक विशेष त्योहार है जो नागा देवताओं या साँप देवताओं की पूजा का महिमामंडन करता है । विवाहित महिलाएं अपने बच्चों की सलामती के लिए इस अनोखे त्योहार को अपने परिवार के साथ मनाती हैं ।
मान्यता है कि इस दिन नागों को अर्पित की गई पूजन सामग्री नाग देवताओं तक पहुंचती है । इस दिन लोग जीवित सांपों की पूजा करते हैं, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि वे नाग देवताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं जो हिंदू धर्म में पूजनीय हैं । नागुला चविथी पूजा के दौरान, बारह नाग देवताओं की पूजा की जाती है, जो और भी अधिक हैं ।
इस दिन को विशेष बनाने के लिए लोग नाग मंत्रों का जाप करते हैं और धूप, दीप, फल और मिठाइयों सहित विभिन्न प्रकार की पूजा सामग्री से सजाकर पूजा करते हैं । यह दिन धार्मिक भावनाओं और पारंपरिक मौसम के साथ उत्सव के माहौल से भर जाता है, जिससे लोगों को एक साथ आने और इस खुशी के पल का आनंद लेने का मौका मिलता है ।
शुभ मुहूर्त
नागुला चविथि पूजा मुहूर्त
सुबह 11:02 बजे से शुरू है, जिसकी अवधि 0 घंटे 0 मिनट है । पूजा 16 नवंबर 2023 को दोपहर 12:34 बजे शुरू होगी और 17 नवंबर 2023 को सुबह 11:02 बजे समाप्त होगी । इस पवित्र अवसर पर आप अपने परिवार और प्रियजनों के साथ नाग देवताओं की पूजा कर सकते हैं । इस अनोखे समय में, नागुला चविथी का महत्वपूर्ण अनुष्ठान करने से आपको धार्मिक और सांस्कृतिक समृद्धि और शांति मिल सकती है । इस खूबसूरत मौके पर आपको और आपके परिवार को शुभकामनाएं ।

इतिहास
नागुला चविथि एक अद्भुत और प्रेमपूर्ण माहौल में मनाया जाने वाला त्योहार है, खासकर आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में । यह त्योहार कार्तिक माह की दिवाली अमावस्या के दिन पड़ता है, जब लोग अपने घरों को दीयों से सजाते हैं और नए आशीर्वाद की कामना करते हैं ।
नागुला चविथि विशेष रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा अपने बच्चों के कल्याण के लिए मनाया जाता है । इस दिन, उन्हें नाग देवताओं का आशीर्वाद पाने के लिए साँपों की पूजा करने का एक अनोखा और सामुदायिक तरीका दिया जाता है । समुद्र में नाग देवता विराजमान होने से लोग इस अवसर पर अपनी श्रद्धा और प्रेम व्यक्त करते हैं ।
विशेष रूप से, बारह नाग देवताओं की पूजा के लिए विशेष स्थानों पर सजीव पूजा की जाती है, जिसमें लोग उन्हें फल, फूल और दीपक चढ़ाते हैं । इस धार्मिक त्योहार में लोग सांपों को नाग देवता मानते हैं और अपने जीवन के हर पल में उन्हें अपने साथ महसूस करते हैं । नागुला चविथि ने एक सांप्रदायिक प्रतीक के रूप में अपनी जगह बना ली है, जिससे लोगों को सांपों के साथ उनके अनूठे रिश्ते का महत्व समझ आ गया है ।
