17 जनवरी को हम सब गुरु गोबिंद सिंह जी की 357वीं जयंती मनाने के लिए एक साथ आएंगे, जिसे सिख धर्म के दसवें गुरु के प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है । इस दिन हम सब मिलकर उनकी अद्भुत शिक्षाओं को याद करते हैं और उनके जीवन के महत्वपूर्ण क्षणों को समर्पित करते हैं ।
खालसा समुदाय की स्थापना
गुरु गोबिंद सिंह जी ने सिख समुदाय को एक मजबूत और एकजुट समूह में संगठित किया । उन्होंने खालसा समुदाय की स्थापना कर सिखों को एक नई दिशा दिखाई । इस खास मौके पर हम उनकी साहस, सेवा और सहानुभूति जैसी शिक्षाओं को अपने जीवन में अपना सकते हैं ।
उनका संदेश है कि हमें सदैव सत्य, न्याय और धर्म का पालन करना चाहिए । इस अद्भुत दिन पर, हम सभी एक- दूसरे को शुभकामनाएं भेजकर साझा कर सकते हैं और सिख धर्म के अनुयायियों के साथ गुरु गोबिंद सिंह जी की महानता को याद कर सकते हैं । उनका संदेश हम सभी को एक सशक्त, समृद्ध समाज की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करता है ।
एक महान योद्धा का जीवन
गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म 2 दिसंबर, 1666 को पटना, बिहार में हुआ था । वह गुरु तेग बहादुर( 9वें गुरु) और माता गुजरी के पुत्र थे । 1956 में, उनके पिता गुरु तेग बहादुर जी को मुगल सम्राट औरंगजेब ने इस्लाम अपनाने से इनकार करने पर फाँसी दे दी थी । इस दुखद घटना ने गुरु गोबिंद सिंह जी को सिख धर्म के नेतृत्व का मार्गदर्शन करने की जिम्मेदारी दी ।
1676 में बैसाखी के दिन मात्र 9 वर्ष की उम्र में उन्हें सिखों का दसवां गुरु घोषित किया गया । गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपना जीवन सिख समाज को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए समर्पित कर दिया । उनका जन्मस्थान, जिसे अब तख्त श्री हरमंदर जी पटना साहिब के नाम से जाना जाता है, एक महत्वपूर्ण विरासत है जो हमें उनकी महानता और समर्पण की याद दिलाती है ।
गुरु गोबिंद सिंह जी का जीवन एक प्रेरणादायक उदाहरण है जो हमें साहस, धर्म और सेवा के माध्यम से अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करता है । गुरु गोबिंद सिंह जी के महत्वपूर्ण योगदान गुरु गोबिंद सिंह जी महान बुद्धिमान व्यक्ति थे ।

खालसा की रचना:
उन्होंने सिख कानून को संहिताबद्ध किया, मार्शल कविता और संगीत लिखा, और ‘Dasam Granth'(” दसवां खंड”) नामक सिख कृति के लेखक थे । उन्होंने सिख धर्म के पवित्र धर्मग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब का संकलन भी किया । खालसा की रचना उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक 1699 में खालसा की स्थापना थी ।
इसमें उन्होंने सिख समाज में पांच के(Kesh, Kara, Kanga, Kachera, Kirpan) का परिचय दिया और एक मजबूत और साहसी समुदाय की नींव रखी । संगीत और कविता में गुरु गोबिंद सिंह जी का योगदान गुरु गोबिंद सिंह जी ने संगीत और काव्य में अपनी अनूठी रचनाएँ कीं, जिन्होंने सिख समाज को सांस्कृतिक विरासत प्रदान की । उनकी रचनाएँ आज भी समृद्धि और समर्पण की भावना से परिपूर्ण हैं ।
गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने समय में साहस, सहानुभूति और सेवा की भावना को बढ़ावा दिया और उन्होंने अपने अनुयायियों को इन मूल्यों के साथ जीने के लिए प्रेरित किया । इस गुरु गोबिंद सिंह जयंती पर, हम आपको और आपके परिवार को सभी सकारात्मक और धार्मिकता से भरे क्षणों की शुभकामनाएं देते हैं । गुरु गोबिंद सिंह जी की महान आत्मा को श्रद्धांजलि ।
